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Thursday, 20 February 2020

अब तो जागो सरकार || देश का असली मुद्दा ये है || अगर हिन्दू-मुस्लिम और चुनावी वादे से फुरसत मिल गयी है तो इस पर भी चर्चा कर लीजिए😢😢😢

अब तो जागो सरकार || देश का असली मुद्दा ये है || अगर हिन्दू-मुस्लिम और चुनावी वादे  से फुरसत मिल गयी है तो इस पर भी चर्चा कर लीजिए😢😢😢




600 मिलियन से ज़्यादा युवाओं वाला देश भारत, जहां सबसे ज़्यादा चर्चा इस बात पर होनी चाहिये कि युवाओं को अच्छा रोज़गार कैसे मिले, साइन्स और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में नयी रिसर्च हो, लोगों का स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग अच्छा हो लेकिन यहाँ चुनाव आते ही पोलिटिकल पार्टियाँ ऊल-जुलूल चुनावी वादे करती हैं जिनमें से शायद कुछ ही पूरे होते हैं... 

एक रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रेजुएट डिग्रीधारियों का 35% हिस्सा बेरोज़गार है. इन के पास नौकरियाँ नहीं हैं. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 2020 में 2019 के मुकाबले कम रही है. जनवरी 2020 में बेरोजगारी दर लगभग 7.1 % रही जो दिसंबर 2019 में 7.6% थी. अगर आँकड़ों से हट कर भी बात करें तो... हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां के युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या सरकारी नौकरियां पाने की कोशिश में होता है. 200,300,500, 1000₹ तक के फॉर्म भरने के बाद और बड़ी मुश्किलों से परीक्षा पास करने के बाद भी युवाओं को ये नही पता होता कि आखिर कब उस का फाइनल रिजल्ट होगा! ताज़ा उदाहरण आरआरबी(रेलवे)  एनटीपीसी के लिए निकाली गयी भर्ती का है. लोगों को फॉर्म भर के लगभग एक साल होने को है लेकिन अभी तक परीक्षा की डेट का कुछ पता नहीं...  ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जहां एक अदद परीक्षा निष्पक्ष करवाने के लिए छात्रों को धरना देना पड़ता है, पुलिस की लाठियाँ तक खानी पड़ी हैं. 

प्राइवेट सेक्टर में मंदी किसी से छिपी नहीं है, ज़्यादा दिन नहीं बीते जब टाटा और महिंद्रा जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनीज़ ने अपना स्टाफ कटिंग किया था.





सरकार का इन बातों पर कोई ठोस स्टैंड सामने नहीं आता, सवाल पूछने पर प्रधानमंत्री बेरोज़गारों को पकौड़े का ठेला लगाने की सलाह देते हैं तो कोई मंत्री बोलता है कि नौकरियाँ तो बहुत हैं बस सही कैंडिडेट नहीं मिलता. आखिर कब तक इन असल मुद्दों से भटका कर युवाओं का ध्यान सिर्फ धार्मिक उन्माद और छदम राष्ट्रवाद में लगाया जायेगा? मीडिया की भी ये ज़िम्मेदारी बनती है कि जितनी कवरेज ये लोग एक धार्मिक या राजनीतिक मुद्दे को देते हैं उतनी ही युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी पर भी डिबेट करवायें, इन मुद्दों पर सरकार से सवाल करें. सड़क पर रोज़गार, शिक्षा और परीक्षाओं के लिए प्रदर्शन कर रहे युवाओं की आवाज़ बने.

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